भारतीय अध्यात्म और चिकित्सा में उपवास का एक विशेष महत्व है। आत्मबल को बढ़ाने की यह एक प्राचीन विधि है जिसे हमारे ऋषियों ने खोज था। आजकल की आम भाषा में उपवास को व्रत कहा जाता है जबकि व्रत का अर्थ प्रतिज्ञा होता है। जिसे किसी भी क्रियाकलाप को लेकर रखा जा सकता है जैसे कि मौन व्रत, दृश्य (आँखों को बंद रखना) व्रत, ब्रह्मचर्य का व्रत और आज कल तो लोग सोशल मीडिया या मोबाइल फोन का भी व्रत रखने लगे हैं। व्रत तो खाने पीने का भी रखा जाता है जिसे उपवास कहते हैं।
उपवास के आध्यात्मिक-मानसिक लाभ
उपवास हमारे मानसिक, आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत उपयोगी है। उपवास का अध्यात्म में एक विशेष स्थान है इसीलिए उपवास की परंपरा को हमारे ऋषियों ने अध्यात्म से जोड़ दिया। हमने देखा होगा कि समाज में उपवास का महत्व केवल पूजा पाठ के कर्मकाण्डों तक ही सीमित रह गया है। लेकिन फिर भी समाज इससे लाभान्वित होता है। इसमें हम आत्मसंयम रखते हुए भगवान का ध्यान करते हैं। उपवास के कारण शरीर की पाचक इंद्रियाँ विश्राम करती हैं जिसके कारण पाचन में लगने वाली ऊर्जा
- उपवास करने से व्यक्ति का आत्मबल बढ़ता है और इच्छा शक्ति दृढ़ होती है।
- उपवास करने से व्यक्ति स्वयं पर नियंत्रण करना सीखता है।
- उपवास रखने से मन शांत होता है और गुस्सा भी कम आता है।
- आत्म नियंत्रण के कारण मन एकाग्र होता है।
- शरीर का औरा (तेज) बढ़ता है।
- उपवास से आध्यात्मिक दृष्टि नवीनीकृत होती है।
- मन सकारात्मकता की ओर बढ़ता है।
- जिस शून्य का अनुभव ध्यान द्वारा होता है उपवास के द्वारा व्यक्ति उसी शून्य का अनुभव करता है।
- उपवास करते हुए पूजा-पाठ अथवा ध्यान लगाने से एक आत्मिक शांति मिलती है और हमें भगवान से निकटता का आभास होता है।
उपवास के शारीरिक लाभ
भारत में एक उक्ति “प्रथम सुख निरोगी काया” प्राचीन काल से लेकर आज तक प्रचलित है। ऋषियों ने ऐसी परम्पराएं स्थापित की जिससे व्यक्ति अपनी सम्पूर्ण आयु स्वस्थ रह कर जी सके। उन्हीं परंपराओं में से एक है उपवास। चिकित्सा पद्धति में षट्कर्म करने से पहले उपवास रखा जाता है। हमने देखा होगा की पशु-पक्षी जब बीमार होते हैं तो वे खाना-पीना छोड़ देते हैं और ठीक हो जाते हैं। वर्ष में दोनों समय के नवरात्रों में ऋतु परिवर्तन का समय होता है इस समय वायरल फीवर का प्रभाव एक वायरस के कारण होता है इस समय उपवास रखने से व्यक्ति पर वायरल फीवर के वायरस का प्रभाव नहीं पढ़ता। उपवास करने से हमारे शरीर को कई लाभ मिलते हैं जो इस प्रकार हैं :-
- भोजन को पचाने में लगने वाली ऊर्जा शरीर से विषैले पदार्थों को निकालने में लगती है।
- उपवास करने से हृदय की पम्पिंग क्रिया में सुधार होता है।
- उपवास करने से इंसुलिन संवेदनशीलता में वृद्धि होती है।
- शरीर में सूजन पैदा करने वाले पदार्थों (जैसे HOMA-IR और C-रिएक्टिव प्रोटीन) के उत्पादन को कम करता है।
- उपवास के दौरान कीटोसिस कई प्रतिक्रियाओं को सक्रिय करता है, जिसमें सूजन में कमी, रक्त शर्करा में सुधार शामिल है।
- उपवास करने से फैट बर्निंग प्रोसेस तेज हो जाती है।
- NCBI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 8 से 12 हफ्तों तक 1 दिन छोड़कर उपवास करने से एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का लेवल 20 से 25 प्रतिशत तक कम होता है।
- वहीं 3 से 12 हफ्तों तक एक दिन छोड़कर उपवास करने से शरीर से कुल कोलेस्ट्रॉल का 10 से 21 प्रतिशत कम होता है। ये आंकड़ा सही वजन वाले व्यक्ति, ज्यादा वजन के व्यक्ति और मोटापे से ग्रसित लोगों का है।
- उपवास से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में विकास होता है।
- उपवास रखने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और पाचन तंत्र सही तरीके से काम करने लगता है जिससे कब्ज, अपच और पेट दर्द की समस्या कम होती है।
- एंग्जाइटी और डिप्रेशन के शिकार लोगों के लिए व्रत रखना लाभदायक सिद्ध हो सकता है।
उपवास रखने से पहले ध्यान रखें कि आप किसी बीमारी से पीड़ित न हों, अगर आपका इलाज चल रहा है तो उपवास न रखें।

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